रुद्राभिषेक किस वस्तु से करें,किस वस्तु से रुद्राभिषेक करने पर क्या फल मिलता है

रुद्राभिषेक क्यों करे 

रुद्र अर्थात भूतभावन शिव का अभिषेक। शिव और रुद्र परस्पर एक-दूसरे के पर्यायवाची हैं।

शिव को ही ‘रुद्र’ कहा जाता है, क्योंकि रुतम्-दु:खम्, द्रावयति-नाशयतीतिरुद्र: यानी कि भोले सभी

दु:खों को नष्ट कर देते हैं। हमारे धर्मग्रंथों के अनुसार हमारे द्वारा किए गए पाप ही हमारे दु:खों के

कारण हैं। रुद्रार्चन और रुद्राभिषेक से हमारी कुंडली से पातक कर्म एवं महापातक भी जलकर भस्म

हो जाते हैं और साधक में शिवत्व का उदय होता है तथा भगवान शिव का शुभाशीर्वाद भक्त को प्राप्त

होता है और उनके सभी मनोरथ पूर्ण होते हैं।

रुद्राभिषेक किस वस्तु से करें,किस वस्तु से रुद्राभिषेक करने पर क्या फल मिलता है

रुद्राभिषेक का महत्व

रुद्राभिषेक से प्रसन्न होते हैं शि‍व जी, हर मनोकामना कर देंगे पूरी

भगवान शिव अपने भक्‍तों की पूजा से बहुत जल्‍दी ही प्रसन्‍न हो जाते हैं लेकिन आप अपनी कुछ विशेष मनोकामनाओं की पूर्ति करना चाहते हैं तो शिव का रुद्राभिषेक करना सबसे शुभ उपाय हो सकता है.

ऐसा कहा जाता है कि एकमात्र सदाशिव रुद्र के पूजन से सभी देवताओं की पूजा स्वत: हो जाती

है। रुद्रहृदयोपनिषद में शिव के बारे में कहा गया है कि सर्वदेवात्मको रुद्र: सर्वे देवा: शिवात्मका अर्थात

सभी देवताओं की आत्मा में रुद्र उपस्थित हैं और सभी देवता रुद्र की आत्मा हैं। हमारे शास्त्रों में विविध

कामनाओं की पूर्ति के लिए रुद्राभिषेक के पूजन के निमित्त अनेक द्रव्यों तथा पूजन सामग्री को बताया

गया है। साधक रुद्राभिषेक पूजन विभिन्न विधि से तथा विविध मनोरथ को लेकर करते हैं। किसी खास मनोरथ

की पूर्ति के लिए तदनुसार पूजन सामग्री तथा विधि से रुद्राभिषेक किया जाता है।

इन राशियो का विवाह नवंबर 2020 से 2021 मे होना निश्चित है

 

महादेव को प्रसन्न करने का रामबाण उपाय है रुद्राभिषेक. ज्योतिष के जानकारों की मानें तो सही समय पर रुद्राभिषेक करके आप शिव से मनचाहा वरदान पा सकते हैं. क्योंकि शिव के रुद्र रूप को बहुत प्रिय है अभिषेक तो आइए जानते हैं, रुद्राभिषेक क्यों है इतना प्रभावी और महत्वपूर्ण….

रुद्राभिषेक की महिमा
भोलेनाथ सबसे सरल उपासना से भी प्रसन्न होते हैं लेकिन  कहते हैं कि रुद्राभिषेक से शिव जी को प्रसन्न करके आप असंभव को भी संभव करने की शक्ति पा सकते हैं तो आप भी सही समय पर रुद्राभिषेक करिए और शिव कृपा के भागी बनिए…
– रुद्र भगवान शिव का ही प्रचंड रूप हैं.
– शिव जी की कृपा से सारे ग्रह बाधाओं और सारी समस्याओं का नाश होता है.
-शिवलिंग पर मंत्रों के साथ विशेष चीजें अर्पित करना ही रुद्राभिषेक कहा जाता है.
– रुद्राभिषेक में शुक्ल यजुर्वेद के रुद्राष्टाध्यायी के मंत्रों का पाठ करते हैं.
– सावन में रुद्राभिषेक करना ज्यादा शुभ होता है.
– रुद्राभिषेक करने से मनोकामनाएं जल्दी पूरी होती हैं.
– रुद्राभिषेक कोई भी कष्ट या ग्रहों की पीड़ा दूर होती है |

कौन से शिवलिंग पर करें रुद्राभिषेक?
अलग –अलग शिवलिंग और स्थानों पर रुद्राभिषेक करने का फल भी अलग होता है. आइए हम आपको बताते हैं कि कौन से शिवलिंग पर रुद्राभिषेक करना ज्यादा फलदायी होता है…
– मंदिर के शिवलिंग पर रुद्राभिषेक करना बहुत उत्तम होता है.
– इसके अलावा घर में स्थापित शिवलिंग पर भी अभिषेक कर सकते हैं.
– रुद्राभिषेक घर से ज्यादा मंदिर में, नदी तट पर और सबसे ज्यादा पर्वतों पर फलदायी होता है.
– शिवलिंग न हो तो अंगूठे को भी शिवलिंग मानकर उसका अभिषेक कर सकते हैं.

रुद्राभिषेक किस वस्तु से करें,किस वस्तु से रुद्राभिषेक करने

पर क्या फल मिलता है

रुद्राभिषेक के विभिन्न पूजन के लाभ इस प्रकार हैं-

जल से अभिषेक;    करने पर वर्षा होती है। •

कुशोदक

असाध्य रोगों को शांत करने के लिए कुशोदक से रुद्राभिषेक करें।

दही से रुद्राभिषेक

• भवन-वाहन के लिए दही से रुद्राभिषेक करें।

गन्ने के रस

लक्ष्मी प्राप्ति के लिए गन्ने के रस से रुद्राभिषेक करें।

शहद एवं घी से अभिषेक

• धनवृद्धि के लिए शहद एवं घी से अभिषेक करें।

तीर्थ के जल से अभिषेक

• तीर्थ के जल से अभिषेक करने पर मोक्ष की प्राप्ति होती है।

इत्र मिले जल से अभिषेक•

इत्र मिले जल से अभिषेक करने से बीमारी नष्ट होती है।

गोदुग्ध से रुद्राभिषेक

• पुत्र प्राप्ति के लिए दुग्ध से और यदि संतान उत्पन्न होकर मृत पैदा हो तो गोदुग्ध से रुद्राभिषेक करें।

• रुद्राभिषेक से योग्य तथा विद्वान संतान की प्राप्ति होती है।

शीतल जल/ गंगाजल से रुद्राभिषेक

• ज्वर की शांति हेतु शीतल जल/ गंगाजल से रुद्राभिषेक करें।

घृत की धारा से रुद्राभिषेक

• सहस्रनाम मंत्रों का उच्चारण करते हुए घृत की धारा से रुद्राभिषेक करने पर वंश का विस्तार होता है।

दुग्धाभिषेक

• प्रमेह रोग की शांति भी दुग्धाभिषेक से हो जाती है।

शकर मिले दूध से अभिषेक

• शकर मिले दूध से अभिषेक करने पर जड़बुद्धि वाला भी विद्वान हो जाता है।

 

• सरसों के तेल से अभिषेक

• सरसों के तेल से अभिषेककरने पर शत्रु पराजित होता है।

 

• शहद के द्वारा अभिषेक

.• शहद के द्वारा अभिषेक करने पर यक्ष्मा (तपेदिक) दूर हो जाती है।

 

•शहद से रुद्राभिषेक

पातकों को नष्ट करने की कामना होने पर भी शहद से रुद्राभिषेक करें।

 

• गोदुग्ध से तथा शुद्ध घी द्वारा अभिषेक

• गोदुग्ध से तथा शुद्ध घी द्वारा अभिषेक करने से आरोग्यता प्राप्त होती है।

• पुत्र की  कामना वाले व्यक्ति शकर मिश्रित जल से अभिषेक करें।

 

ऐसे तो अभिषेक साधारण रूप से जल से ही होता है।

रुद्राभिषेक

1)   जल से अभिषेक ( Jal Se Rudrabhishek Karne Ke Labh )

हर तरह के दुखों से छुटकारा पाने के लिए भगवान शिव का जल से अभिषेक करें

2) दूध से अभिषेक ( Dudh Se Rudrabhishek Karne Ke Labh )

शिव को प्रसन्न कर उनका आशीर्वाद पाने के लिए दूध से अभिषेक करें

3) फलों का रस ( Falon Ka Ras Se Rudrabhishek Karne Ke Labh )

अखंड धन लाभ व हर तरह के कर्ज से मुक्ति के लिए भगवान शिव का फलों के रस से अभिषेक करें

4) सरसों के तेल से अभिषेक ( SarasonKe  Tel Se Rudrabhishek Karne Ke Labh ) –

ग्रहबाधा नाश हेतु भगवान शिव का सरसों के तेल से अभिषेक करें

5) चने की दाल ( Chane Ki Daal Se Rudrabhishek Karne Ke Labh )

किसी भी शुभ कार्य के आरंभ होने व कार्य में उन्नति के लिए भगवान शिव का चने की दाल से अभिषेक करें

6) काले तिल से अभिषेक ( Kale Til Se Rudrabhishek Karne Ke Labh ) –

तंत्र बाधा नाश हेतु व बुरी नजर से बचाव के लिए काले तिल से अभिषेक करें –

7) शहद मिश्रित गंगा जल ( Shahad Mishrit Gangajal Se Rudrabhishek Karne Ke Labh ) –

संतान प्राप्ति व पारिवारिक सुख-शांति हेतु शहद मिश्रित गंगा जल से अभिषेक करें

8) घी व शहद ( Ghee Or Shahad Se Rudrabhishek Karne Ke Labh  –

रोगों के नाश व लम्बी आयु के लिए घी व शहद से अभिषेक करें –

शिवलिंग पर स्वच्छ जल से भी अभिषेक करें |

 

रुद्राभिषेक कब होता है सबसे उत्तम?
कोई भी धार्मिक काम करने में समय और मुहूर्त का विशेष महत्व होता है. रुद्राभिषेक के लिए भी कुछ उत्तम योग बनते हैं. आइए जानते हैं कि कौन सा समय रुद्राभिषेक करने के लिए सबसे उत्तम होता है…
– रुद्राभिषेक के लिए शिव जी की उपस्थिति देखना बहुत जरूरी है.
– शिव जी का निवास देखे बिना कभी  भी रुद्राभिषेक न करें,नहीं तो इसका प्रतिकूल असर पड़ता है , बुरा प्रभाव होता है.
– शिव जी का निवास तभी देखें जब मनोकामना की पूर्ति चाहते हो |इस धरती पर लगभग सभी लोग मनोकामना की पूर्ति हेतु ही रुद्राभिषेक करते है ,इसीलिए रुद्राभिषेक कराते समय शिव वास जरुर देखे |

शिव जी का निवास कब मंगलकारी होता है?
देवों के देव महादेव ब्रह्माण्ड में घूमते रहते हैं. महादेव कभी मां गौरी के साथ होते हैं तो कभी-कभी कैलाश पर विराजते हैं. ज्योतिषाचार्याओं की मानें तो रुद्राभिषेक तभी करना चाहिए जब शिव जी का निवास मंगलकारी हो…
– हर महीने के शुक्ल पक्ष की द्वितीया और नवमी को शिव जी मां गौरी के साथ रहते हैं.
– हर महीने कृष्ण पक्ष की प्रतिपदा, अष्टमी और अमावस्या को भी शिव जी मां गौरी के साथ रहते हैं.
– कृष्ण पक्ष की चतुर्थी और एकादशी को महादेव कैलाश पर वास करते हैं.
– शुक्ल पक्ष की पंचमी और द्वादशी तिथि को भी महादेव कैलाश पर ही रहते हैं.
– कृष्ण पक्ष की पंचमी और द्वादशी को शिव जी नंदी पर सवार होकर पूरा विश्व भ्रमण करते हैं.
– शुक्ल पक्ष की षष्ठी और त्रयोदशी तिथि को भी शिव जी विश्व भ्रमण पर होते हैं.
– रुद्राभिषेक के लिए इन तिथियों में महादेव का निवास मंगलकारी होता है.

शिव जी का निवास कब अनिष्टकारी होता है?
शिव आराधना का सबसे उत्तम तरीका है रुद्राभिषेक लेकिन रुद्राभिषेक करने से पहले शिव के वास का ध्यान देना  बहुत जरूरी है…
– कृष्णपक्ष की सप्तमी और चतुर्दशी को भगवान शिव श्मशान में समाधि में रहते हैं.
– शुक्लपक्ष की प्रतिपदा, अष्टमी और पूर्णिमा को भी शिव श्मशान में समाधि में रहते हैं.
– कृष्ण पक्ष की द्वितीया और नवमी को महादेव देवताओं की समस्याएं सुनते हैं.
– शुक्लपक्ष की तृतीया और दशमी में भी महादेव देवताओं की समस्याएं सुनते हैं.
– कृष्णपक्ष की तृतीया और दशमी को नटराज क्रीड़ा में व्यस्त रहते हैं.
– शुक्लपक्ष की चतुर्थी और एकादशी को भी नटराज क्रीड़ा में व्यस्त रहते हैं.
– कृष्णपक्ष की षष्ठी और त्रयोदशी को रुद्र भोजन करते हैं.
– शुक्लपक्ष की सप्तमी और चतुर्दशी को भी रुद्र भोजन करते हैं.
– इन तिथियों में मनोकामना पूर्ति के लिए अभिषेक नहीं किया जा सकता है.

 

 

 

#MYSTERYOFDHARMA #RAJKUMARDUBEY

https://youtu.be/EHa_9bwWfbg

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *